संघटित अपराधियों का सरकारी गिरोह
सदियों पहले इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश पुलिस को संघटित अपराधियों का सरकारी गिरोह बताया था। नोएडा मे प्रशिक्षु दारोगा द्वारा एक आम नागरिक को सरेआम अपने सर्विस रिवालवर से गोली मार देने की घटना से फिर सिद्ध हुआ है कि उत्तर प्रदेश पुलिस की अराजक मानसिकता मे आज भी कोई परिवर्तन नहीं हुआ है ।प्रदेश मे 20 मार्च 2017 से 31 जनवरी 2018 तक मेरठ मण्डल मे 449, आगरा मे 210, बरेली 196, कानपुर मे 91 कुल 1142 एनकाउन्टर पुलिस ने किये है ।फर्जी एनकाउन्टर के कई किस्से हम प्रदेश वासियों के जेहन मे है । अभी 2016 मे सी बी आई कोर्ट ने फर्जी एनकाउन्टर की कहानी बनाकर 12 लोगों की हत्या के आरोप मे 47 पुलिस कर्मियों को दोषी पाया है ।इसके पूर्व आइ ए एस अधिकारी किंजल सिंह के पुलिस अधिकारी पिता की हत्या के आरोपी पुलिस कर्मियों को अदालत ने सजा सुनाई है । समझ मे नही आता , पुलिस की अराजकता और उसकी ज्यादतियों के विरूद्ध धरना प्रदर्शन करने वाले विपक्षी दलों के सांसद विधायक सत्तारूढ होते ही पुलिस ब्यवस्था मे सुधार करने से पीछे क्यों हट जाते है ? वर्तमान मुख्य मंत्री को पुलिस ज्यादतियों का निजी अनुभव है ।गोरखपुर के तत्कालीन एस एस पी जगमोहन यादव के अपमानजनक ब्यवहार से क्षुब्ध योगी महाराज संसद मे अपने आॅसू रोके नहीं पाये थे इसके बावजूद उनके राज मे पुलिस को अनाप शनाप एनकाउन्टर करने की छूट मिली हुई है ।अटल बिहारी बाजपेयी ने अपने प्रधानमंत्रितव काल मे पुलिस की ब्यवस्था मे सुधार के लिए प्रख्यात न्यायविद होली सोराबजी की अध्यक्षता मे एक समिति का गठन किया था । सोराबजी समिति की सिफारिशों पर सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी मुहर लगा दी है परन्तु भाजपा शासित प्रदेशों मे भी इस समिति के सुझावों को लागू करना किसी की प्राथमिकता मे नहीं है और उसी कारण पुलिस कर्मियों को मनमानी करने की छूट मिली हुई है ।
सदियों पहले इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश पुलिस को संघटित अपराधियों का सरकारी गिरोह बताया था। नोएडा मे प्रशिक्षु दारोगा द्वारा एक आम नागरिक को सरेआम अपने सर्विस रिवालवर से गोली मार देने की घटना से फिर सिद्ध हुआ है कि उत्तर प्रदेश पुलिस की अराजक मानसिकता मे आज भी कोई परिवर्तन नहीं हुआ है ।प्रदेश मे 20 मार्च 2017 से 31 जनवरी 2018 तक मेरठ मण्डल मे 449, आगरा मे 210, बरेली 196, कानपुर मे 91 कुल 1142 एनकाउन्टर पुलिस ने किये है ।फर्जी एनकाउन्टर के कई किस्से हम प्रदेश वासियों के जेहन मे है । अभी 2016 मे सी बी आई कोर्ट ने फर्जी एनकाउन्टर की कहानी बनाकर 12 लोगों की हत्या के आरोप मे 47 पुलिस कर्मियों को दोषी पाया है ।इसके पूर्व आइ ए एस अधिकारी किंजल सिंह के पुलिस अधिकारी पिता की हत्या के आरोपी पुलिस कर्मियों को अदालत ने सजा सुनाई है । समझ मे नही आता , पुलिस की अराजकता और उसकी ज्यादतियों के विरूद्ध धरना प्रदर्शन करने वाले विपक्षी दलों के सांसद विधायक सत्तारूढ होते ही पुलिस ब्यवस्था मे सुधार करने से पीछे क्यों हट जाते है ? वर्तमान मुख्य मंत्री को पुलिस ज्यादतियों का निजी अनुभव है ।गोरखपुर के तत्कालीन एस एस पी जगमोहन यादव के अपमानजनक ब्यवहार से क्षुब्ध योगी महाराज संसद मे अपने आॅसू रोके नहीं पाये थे इसके बावजूद उनके राज मे पुलिस को अनाप शनाप एनकाउन्टर करने की छूट मिली हुई है ।अटल बिहारी बाजपेयी ने अपने प्रधानमंत्रितव काल मे पुलिस की ब्यवस्था मे सुधार के लिए प्रख्यात न्यायविद होली सोराबजी की अध्यक्षता मे एक समिति का गठन किया था । सोराबजी समिति की सिफारिशों पर सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी मुहर लगा दी है परन्तु भाजपा शासित प्रदेशों मे भी इस समिति के सुझावों को लागू करना किसी की प्राथमिकता मे नहीं है और उसी कारण पुलिस कर्मियों को मनमानी करने की छूट मिली हुई है ।
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